कथा मनोरंजन के लिये नहीं आत्म कल्याण के लिये है इसके श्रवण से अनेक रोग दूर होते है भागवत श्रवण से इंसान तो क्या प्रेत आत्मा का भी मोक्ष हो जाता है । यह उद्गार राष्ट्र संत भीमाशंकर शास्त्री ने व्यक्त किए वे जय मालवा श्रीकृष्णा समिति बघाना नीमच द्वारा निर्धन कन्या के सामुहिक विवाह निमित 20 से 26 मई तक शुक्रवार को आनंद सागर धाम में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा में बोल रहे थे । उन्होने कहां कि शिव कृपा बिना राम-कृष्ण की कृपा नहीं पा सकते है । मनुष्य जब भी किसी देवी-देवता को प्रणाम करे तो अपने ईष्ट देवता को भी नमन करना चाहिए । हम किसी भी देवता का अपमान नहीं करना चाहिए । गुरू कर्म काटता है और ईश्वर से मिलाता है भगवान बार-बार मारते है और तारते भी है हिरणकश्यप को भी मारा था जो भी धर्म का कार्य करते है भगवान उन्हें तारते है कुछ व्यक्ति धर्म के कार्य में व्यवधान पहूंचाने की कोशिश करते है धर्म के नाम पर जब भी कोई व्यवधान हो तो नर्सिग भगवान को याद करें जो ब्रम्हा होकर असंतोष रहे उसका नाश होता है कुल का वास्तविक आभुषण आपकी लज्जा है बेटियों को खुब पढ़ाओं और लज्जा शर्म का भी ध्यान रखें बाद में ससुराल के लिये बिदा करें । बेटी को खुब पढ़ाईये भी और आगे भी बढ़ाइये । हमारे हिन्दु धर्म में पहला संस्कार गर्भ संस्कार व पहली भक्ति माना गया है माॅं के पेट में ही बच्चें संस्कार सिख कर आते है आजकल हमारे घरों में महापुरूषों के चित्र नहीं लग रहे है चिंतन का विषय है जीवों की आत्मा से संसार बनता है जीव आत्मा तीन प्रकार की होती है पहली परमात्मा, दुसरी जीव आत्मा, तीसरी महात्मा होती है हम हमारे बाहर एवं भीतर दीपक लगायें राम के नाम का दीपक जलाये तेल से ना कि मोमबत्ती से । मदिरा से सबकुछ चला जाता है व्यसन मुक्त होने का प्रण लेवें । समाज का नवनिर्माण करें । पहले सात ग्रह हुआ करते थे अब नौ ग्रह भगवान हो गये है । जब तक उपवास रखें तब तक किसी की बुराई न करें । गाय के हिस्से का खाकर आप सुखी नहीं हो सकते है क्योंकि गायों में 35 करोड़ देवता निवास करते है उन गायों को हम भूखा मारकर भगा रहे है और उनकी गौचर भूमि को खा रहे है कलियुग में जो जन्म लेगा उसका वेश कागले जैसा और बोली हंस जैसी होगी । कथा में थोरा मन दर्पण कहलायें…..हो चलो-चलो संतो के दरबार में शिवजी कंठ राम वीरा…..छोरा मत भुल जाजो आज ग्यारस है आज मने ग्यारस है ग्यारस है…… ओ गंगा मया आपकी जय हों आदि भजन प्रस्तुत किये । हिरणकश्यप, नारायण, प्रहलाद चरित्र, होलिका, सुखदेव, धनंवतरी भगवान, बलि राजा, लवकुश, परशुराम आदि धार्मिक प्रसंगों का वर्तमान परिपेक्ष्य में महत्व प्रतिपादित किया । कथा में कुंज अहीर, रक्षित प्रेमी, अंश अहीर, सोनू अहीर ने कृष्ण का, हर्ष प्रेमी, हिंमाशु, तुलसीराम नंदबाबा का अभिनय प्रस्तुत किया । आरती पौथी पूजन में महामण्डलेश्वर सुरेशानंद सरस्वती, उमरावसिंह गुर्जर, हरगोविन्द दिवान, सुन्दर मौसी, गंगा मौसी अहीर, पूर्व पार्षद जुगल किशोर अहीर, रमेश अहीर, रामदयाल अहीर, रामकुमार प्रेमी, दीपक प्रेमी, राजेश अहीर, ओमप्रकाश अहीर, रेलवे के रमेशचन्द्र अहीर, केदार धनगर पड़दा, गोविन्द पी. गर्ग दारूवाले, गोपालकृष्ण सोनी रतनगढ़, राजू नागदा मोड़ी, कंवरलाल धनेरिया, युगलकिशोर जावरा, रामप्रसाद नागदा हनुमंत्या व्यास, लालसिंह पावती, गणेश गुर्जर दलावदा, बाबूलाल पाटीदार छोटी सादड़ी, हरिशंकर धामनिया, प्रहलाद पाटीदार उपहेड़ा आदि गणमान्य लोग सहभागी बने ।
